Ekadashi Vrat Se Swasthya Raxsha


Sant Shri Asaramji Amritvani,

Sant Shri Asaramji Ashram ,

Haridwar

3 June 2009

Satsang Ke Mukhya Ans :

*  15 din me ek baar upvass doshon ko harta hai…

* 100 umra vale vyakti se pucha gaya aap itni badi umar me bhi swasth rahte hain kya karan hai ? ….

* jo baar baar khate hain , to pachan ras chuta hai , jisse pachan kamjor ho jata hai….

* jaise manshik sakti jagane ke liye maun param sadhan hai eise hi saririk shakti jagane ke liye aur rogon ko mitane ke liye , vrat param sadhan hai…

* upvaas rakne se aadmi kamjor nahi hota….

* upvaas aur maun to sadhna ka merudand hai..

Moxshda Ekadashi : 28 November 2009

मोक्षदा एकादशी

युधिष्ठिर बोले : देवदेवेश्वर ! मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष में कौन सी एकादशी होती है ? उसकी क्या विधि है तथा उसमें किस देवता का पूजन किया जाता है? स्वामिन् ! यह सब यथार्थ रुप से बताइये ।

श्रीकृष्ण ने कहा : नृपश्रेष्ठ ! मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का वर्णन करुँगा, जिसके श्रवणमात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है । उसका नाम मोक्षदा एकादशी है जो सब पापों का अपहरण करनेवाली है । राजन् ! उस दिन यत्नपूर्वक तुलसी की मंजरी तथा धूप दीपादि से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए । पूर्वाक्त विधि से ही दशमी और एकादशी के नियम का पालन करना उचित है । मोक्षदा एकादशी बड़े बड़े पातकों का नाश करनेवाली है । उस दिन रात्रि में मेरी प्रसन्न्ता के लिए नृत्य, गीत और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए । जिसके पितर पापवश नीच योनि में पड़े हों, वे इस एकादशी का व्रत करके इसका पुण्यदान अपने पितरों को करें तो पितर मोक्ष को प्राप्त होते हैं । इसमें तनिक भी संदेह नहीं है ।
जोकल्याणमयी मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और मरने के बाद वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है । यह मोक्ष देनेवाली मोक्षदा एकादशी मनुष्यों के लिए चिन्तामणि के समान समस्त कामनाओं को पूर्ण करनेवाली है । इस माहात्मय के पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है ।

Part -1

Part-2

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