Gurudev Ka Gyan Amrit

जिस प्रकार मधुमक्खी सैकडो – हजारों फूलों से मकरंद चूस कर लाती हैं और उसे अपने छत्ते में कई दिनों तक संजो कर उससे मधु बनती हैं फिर उसका रसास्वादन करती हैं , ठीक उसी प्रकार सदगुरु  एवं उनके द्वारा निर्दिष्ट सत्सस्त्रों के अमृतवचनों को अपने ह्रदय में संजोने वाला और उनका मनन कर उन्हें मधु की तरह गाढा बनाने वाला बुद्धिमान साधक इस भगवदीय खजाने के द्वारा गुरु अमृत का रसास्वादन कर अत्मोनत्ति के रास्ते आगे बढता है |

Shri Sureshanandji bata rahe hain :

Pujya Gurudev ka gyan amrit kaisa hai ?

Ham sabhi sadhkon ko kya kerna hai ?

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Suniye shri sureshanandji ki amrit vani :


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